आज़ादी का भ्रम” एक विचारोत्तेजक और वैचारिक पुस्तक है, जो आज़ादी, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सोच के वास्तविक अर्थ पर गहराई से प्रकाश डालती है। यह पुस्तक पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है कि क्या हम सच में आज़ाद हैं या केवल एक भ्रम में जी रहे हैं। जिस आज़ादी पर हमें गर्व है, क्या वह वास्तव में हमारे विचारों, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार की वास्तविक परिस्थितियों में दिखाई देती है—यह पुस्तक इसी प्रश्न को समाज के सामने पूरी गंभीरता से रखती है।
यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज के सामने रखा गया एक तीखा और ईमानदार प्रश्न है, जो युवाओं और विद्यार्थियों को सच्ची आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सही दिशा में सोचने की प्रेरणा देता है। यह रचना यह स्पष्ट करती है कि वास्तविक आज़ादी केवल अधिकारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सही सोच, ज्ञान, आत्मबल और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया से जुड़ी होती है।
कृतिम सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सामाजिक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों से प्रेरित यह पुस्तक समाज में बौद्धिक जागरण, आत्मचिंतन और सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त प्रयास है। “आज़ादी का भ्रम” युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है, जो उन्हें सोचने, समझने और सचेत रूप से आगे बढ़ने की दिशा दिखाती है।https://amzn.in/d/foL1CxX