आज़ादी का भ्रम” एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक पुस्तक है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में आज़ाद हैं या केवल एक भ्रम में जी रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और सोच की सच्चाई को उजागर करती यह रचना युवाओं और विद्यार्थियों को आत्मचिंतन, जागरूकता और सच्ची आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करती है। कृतिम सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सामाजिक मूल्यों से प्रेरित यह पुस्तक समाज में बौद्धिक जागरण का संदेश देती है।